40 सेकंड तक हाथ धोने की प्रथा शुरु कराने और गर्भवती महिलाओं की जान बचाने वाले डॉ. इग्नाज को गूगल ने किया याद

हेल्थ डेस्क. हाथों को 20-40 सेकंड तक धोकर बैक्टीरिया और वायरस को शरीर में जाने से रोका जा सकता है। 19वीं शताब्दी में यह बात किसी को नहीं पता नहीं थी। इसे दुनियाभर को बताने वाले डॉ. इग्नाज सेमेल्विस को गूगल ने शुक्रवार को डूडल बनाकर याद किया। गूगल ने इनका एक वीडियो भी बनाया है, जिसमें हाथ धोने के तरीकों के बारे में दिखाया गया है।

19वीं सदी में हंगरी के डॉ. इग्नाज सेमेल्विस ने हाथ धोने के फायदों की खोज की और संक्रमण से लगातार हो रही मौत पर रोक लगाने में सफलता हासिल की।

कैसे शुरू हुई हाथ धोने की प्रथा
19वीं सदी में एक ऐसा समय आया जब अज्ञात बीमारी के कारण मौत के आंकड़े बढ़ रहे थे। उस समय हाथ धोने की प्रथा नहीं थी। डॉ. इग्नाज सेमेल्विस ने देखा कि मां बनने वाली औरतें और नवजात बच्चे अज्ञात बीमारी के कारण तेजी से मर रहे हैं। उस समय डॉ. इग्नाज सेमेल्विस ने प्रस्ताव रखा कि सबसे पहले डॉक्टर हाथ साफ रखना शुरू करेंगे। उन्होंने पाया कि डॉक्टर और अन्य स्टाफ अनजाने में महिलाओं और अन्य रोगियों के बैक्टीरिया से संक्रमित कर रहे थे।

वियना में लागू हुआ प्रस्ताव
उनका प्रस्ताव 1840 में वियना में लागू किया गया। हाथ धोने की व्यवस्था लागू करने के बाद मृत्यु दर में तेजी से गिरावट आई। मैटरनिटी वार्ड जहां गर्भवती महिलाएं एडमिट रहती थीं, वहां होने वाली मौतें घटीं। हालांकि, बहुत सारे डॉक्टरों ने उनकी बात को ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया इसलिए यह प्रयोग ज्यादा कामयाब साबित नहीं हो सका। डॉक्टर ये मानने को तैयार नहीं थे कि अस्पतालों की गंदगी और हाथों के संक्रमण से बीमारी फैलती है। लेकिन डॉ. सेमेल्विस की पहचान गर्भवती महिलाओं की जान बचाने वाले के रूप में हो चुकी थी। बाद में उन्हें हाथ को साफ करने के फायदों की खोज करने वाले के रूप में जाना गया।

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